
साइट मैनेजर का ग्रामीणों क़ो जवाब “जहाँ जाना हैं जाओ ठेकेदार मंत्री जी के आदमी हैं….
अमलीपदर:-जिले के आदिवासी विकासखंड मैनपुर में योजनाओं की तस्वीर जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। शासन की करोड़ों की योजनाएं कागजों में पूरी होने के कगार पर हैं, जबकि ज़मीन पर सिर्फ गड्ढे, कीचड़ और पुलिया कि अधूरी ढलाई अब भी बची हुई है। ताजा उदाहरण देखने क़ो मिला मैनपुर ब्लॉक के ग्राम बुर्जाबहाल-कमार पारा मार्ग पर बनने वाली 95 लाख की पक्की सड़क और पुलिया का,जो 16 महीने बितने के बावजूद अधूरी पड़ी है। जिसके चलते ग्रामीण परेशान हैं और ठेकेदार के रसूख के आगे जिम्मेदार भी बेबस हैं,चुंकि ठेकेदार मंत्री जी के आदमी हैं,ऐसा कहना हैं साइट संभाल रहें मैनेजर का हैं, जिन्होंने ग्रामीणों के समक्ष यह कहकर पल्ला झाड लिया कि “जहां जाना हैं जाओ ठेकेदार मंत्री जी के आदमी हैं..!” अब वो मंत्री कौन हैं बोलने वाले व्यक्ति क़ो पता हैं और जिम्मेदार भी भलीभांति वाकिफ हैं, इसलिए बेचारे बेबस हैं…?
दबंग ठेकेदार,खामोश जिम्मेदार….
प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान योजना के तहत स्वीकृत 1.35 किलोमीटर सड़क को कुरूद के एक रसूखदार ठेकेदार“मैसर्स पवार कंस्ट्रक्शन” को सौंपा गया था। लेकिन ठेकेदार ने पुल की आधी ढलाई कर काम बंद कर दिया। न कोई मजदूर,न कोई मशीन,न कोई जवाबदेही। ग्रामीणों की बार-बार अपील पर ठेकेदार के मैनेजर का जवाब साफ था-“जहां जाना है जाओ, हम मंत्री जी के आदमी हैं”!

बरसात में आवागमन का और कोई विकल्प नहीं, कीचड़ में फंसे लोग….
300 से ज्यादा कमार आदिवासी परिवारों की इस बस्ती का जिला मुख्यालय से एकमात्र संपर्क यही सड़क है। ग्रामीण बाबूलाल और दिनेश सोरी बताते हैं कि पहले कच्चे रास्ते से किसी तरह आते-जाते थे, लेकिन अब अधूरी पुलिया और फैली हुई निर्माण सामग्री ने आवाजाही भी बंद कर दी है। बरसात में स्कूली बच्चों से लेकर मरीजों तक को अस्पताल ले जाना दूभर हो गया है।
तय समय सीमा में पूरा नहीं हुआ सड़क….
कार्यस्थल पर लगे सूचना पटल के आधार पर सड़क निर्माण 1 वर्ष कि अवधि में पूरा होना था,जो कि अधिकारीयों कि उदासीनता और निरिक्षण के अभाव में कार्य कछुए गति से चल रहा हैं,सूचना पटल के आधार पर 19 मार्च 2024 क़ो कार्य प्रारम्भ किया गया था जो कि एक वर्ष से ज्यादा समय बितने के बावजूद कार्य पूर्ण नहीं हों सका,जिसका खम्याजा ग्रामीणों क़ो भुगतना पड़ रहा हैं !

देरी के लिए जाँच कमेटी बनी लेकिन रिपोर्ट तक नहीं आई….
केंद्र सरकार की इस योजना के क्रियान्वयन में जिला प्रशासन की भूमिका भी कठघरे में है। एक माह पहले दिशा कमेटी की बैठक में खुद सांसद और विधायक ने इन योजनाओं में लापरवाही की बात उठाई थी। आदेश हुआ कि पीडब्ल्यूडी, PMGSY और RWD मिलकर एक जॉइंट कमेटी बनाएं और देरी के कारणों की जांच करें। लेकिन आज तक रिपोर्ट फाइल में ही दबी पड़ी है। “चुंकि ठेकेदार मंत्री जी के आदमी हैं”..!
PMGSY विभाग की चुप्पी सब पर भारी….
सड़क निर्माण कार्यपालन अभियंता अभिषेक पाटकर कहते हैं कि “नई तकनीक टेरा जॉइंट की मंजूरी दिल्ली भेजी गई है, इसलिए सड़क का काम रुका है।”लेकिन सवाल यह है कि पुल ढलाई क्यों नहीं हुई? क्यों बारिश के मौसम में पुलिया अधूरी छोड़ दी गई? कोई सीधा जवाब नहीं मिलता।
क्या कहते हैं एसडीओ चंद्राकर…
ये गलत बात हैं,पता नहीं कौन मंत्री हैं, चलिए में बात करके बताता हूँ….?
