
सुकमा:–छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में तेंदूपत्ता संग्राहकों की बोनस राशि के घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार के निर्देश पर वन विभाग के 11 अधिकारी-कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 4 वन कर्मचारी और 7 समिति प्रबंधक शामिल हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की संयुक्त कार्रवाई में सभी आरोपियों को दंतेवाड़ा कोर्ट में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
जाने क्या है पूरा मामला…?
तेंदूपत्ता संग्राहकों को साल 2021 और 2022 के लिए करीब 6.5 करोड़ रुपये की बोनस राशि दी जानी थी,जिसे वन मंडल सुकमा की 15 समितियों (2021) और 10 समितियों (2022) को ट्रांसफर किया गया था। यह राशि लगभग 66 हजार संग्राहकों को बांटी जानी थी। लेकिन जांच में सामने आया कि फर्जी नामों से भुगतान दिखाया गया,जिनमें कुछ मृतक संग्राहकों के नाम भी शामिल हैं। कई संग्राहकों को आज तक बोनस की राशि नहीं मिली। 362 लाख रुपये से अधिक राशि की नगद निकासी कर ली गई, जिसका वितरण नहीं हुआ। अफसरों ने नक्सल संवेदनशीलता का हवाला देकर नगद वितरण की अनुमति ली थी।
दोषियों पर कार्रवाई की शुरुआत कैसे हुई….?
जिला पंचायत सदस्य हुंगाराम मरकाम ने इस मामले को उठाया और वन मंत्री केदार कश्यप से मिलकर जांच की मांग की। भाजपा के दबाव के बाद सरकार ने एसीबी और ईओडब्ल्यू को जांच सौंपी। जांच में घोटाले की पुष्टि हुई और उसके बाद गिरफ्तारी हुई।
अब तक की प्रशासनिक कार्रवाई……
11 समिति प्रबंधक कार्य से पृथक किए गए।
सभी 11 समितियों के संचालक मंडल भंग किए गए।
वनमंडलाधिकारी सुकमा को निलंबित कर उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।
समितियों के नोडल अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरु कर दी गई है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज़….
हूंगाराम मरकाम ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 2018 से 2023 तक कांग्रेस शासन में लूट मची रही। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत पर भी सवाल उठाए और कवासी लखमा के कथित शराब घोटाले पर चुप्पी को लेकर कांग्रेस की आलोचना की।
