
बलरामपुर:-छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में “VIP संस्कृति” का एक नया नमूना देखने को मिला, जहाँ नियम-कानून को ताक पर रखकर एक DSP की पत्नी ने सरकारी गाड़ी को “बर्थडे मंच” बना डाला। नीली बत्ती वाली XUV 700 के बोनट पर केक काटते हुए, सनरूफ और डिक्की पर सवार परिवार के साथ जश्न का वीडियो सोशल मीडिया पर तूफान मचाने के बाद अब चर्चा का केंद्र है, लेकिन मजेदार बात ये है कि इस “रोड शो” के लिए सिर्फ ड्राइवर को ही बलि का बकरा बनाया गया है, जबकि असली “VIP स्टार” पर प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी बरकरार है।
यह है ये “VIP तमाशा”
बलरामपुर बटालियन में तैनात DSP तस्लीम आरिफ की पत्नी का वायरल वीडियो देखकर तो ऐसा लगता है मानो सरकारी गाड़ी उनका निजी “पार्टी बस” हो। नीली बत्ती लगी XUV 700 के बोनट पर बैठकर केक काटना, दरवाजे और सनरूफ पर लोगों का जमावड़ा, और दूसरी सरकारी गाड़ी में परिवार का वाटरफॉल टूर—ये सब कुछ “नियमों की धज्जियाँ उड़ाओ” कैंपेन का हिस्सा लगता है। लेकिन जब बात कार्रवाई की आई, तो प्रशासन ने सिर्फ ड्राइवर को निशाना बनाया। मानो गाड़ी DSP साहब को नहीं प्रशासन ने ड्राइवर को निजी उपयोग के लिए दिया हो…?
बेचारे ड्राइवर पर हुई FIR, साहब के ऊपर मेहरबानी क्यों?
वीडियो वायरल होने के बाद अंबिकापुर के गांधीनगर थाने में ड्राइवर के खिलाफ धारा 281 BNS,184 और 177 मोटर व्हीकल एक्ट के तहत FIR ठोक दी गई। गुनाह? बोनट, सनरूफ और दरवाजों पर लोगों को बिठाकर “लापरवाही भरी ड्राइविंग”। लेकिन सवाल ये है कि गाड़ी को “पिकनिक स्पॉट” बनाने वाली DSP की पत्नी और उनके साथियों पर कार्रवाई क्यों नहीं? क्या नीली बत्ती का रौब सिर्फ ड्राइवर को कुचलने के लिए है, और VIPs को “इम्यूनिटी पास” मिला हुआ है? और कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति क्यों?
कानून का “VIP ट्रीटमेंट” कब तक ?
ये पूरा मामला उस पुरानी कहावत को चरितार्थ करता है छोटी मछली को फँसाओ, बड़ी को छोड़ दो। ड्राइवर पर FIR तो ठीक, लेकिन सरकारी गाड़ी का दुरुपयोग करने वालों पर चुप्पी क्यों? क्या नियम सिर्फ आम आदमी और ड्राइवरों के लिए बने हैं? जनता की नजरें अब प्रशासन पर टिकी हैं देखते हैं कि ये “VIP बर्थडे ड्रामा” यहीं दब जाता है, या कानून अपनी “नीली बत्ती” सबके लिए बराबर जलाता है।
