
मनरेगा में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष नहीं मिला 10 प्रतिशत के बराबर मजदूरी…
गरियाबंद:– ग्राम पंचायत चुनाव हुए महिने बीत गए लेकीन आज भी मानो ग्राम पंचायत में आचार संहिता लागू है ऐसा प्रतीति हों रहा है,जिस तरह से आचार संहिता में विकास कार्य ठप होते है ठीक वैसा ही हाल प्रदेश के ग्राम पंचायतों का है जहां विकास कार्यों की बात करे तो कछुवे से भी धीमी चल रहीं है,अभी भीषण गर्मी का मौसम चल रहा गांव की तालाब सूखे पड़े है कई ग्राम पंचायत की बोर बोरिंग खराब है,लेकीन महज कुछ कार्यों को भी कराने के लिए पंचायत में कोई फंड नही हैं,नवनिर्वाचित सरपंच चुनाव में लाखो खर्च कर जीत कर आते है यह बात किसी से छिपी नहीं,आज स्थिती ऐसा ही पंचायतो के सरपंच के हाथ खाली पड़े है कई ग्राम पंचायत के सरपंच ने तो अपनी मान सम्मान और जनता की सेवा करने की इच्छा के कारण कर्ज लेकर या इधर-उधर हाथ पाव मारकर सामग्री उधार कर कार्य को करवाने के लिऐ मजबुर है।
मनरेगा से लेकर अन्य मद तक ठप्प
हम बात करें ग्राम पंचायतों की अगर इस साल का आंकड़ा और पिछले साल की आंकड़ा निकाला जाए तो जमीन आसमान का फर्क नजर आएगा,विकास कार्यों की सूचि में वर्तमान समय में ग्राम पंचायत के पास मनरेगा मजदूरी के लिए लोग ताक रहे की कब गांव में रोजगार गारंटी कार्य शूरू होगा,इस वर्ष की तुलना में पीछले वर्ष जाकर देखे तो स्थिती ऐसा था की तालाब गहरीकरण,भूमि सुधार,सिंचाई नाली,चेकडेम,कच्ची सड़क निर्माण,मिट्टी मुरूम सड़क निर्माण, नाला साफ सफाई, साइट वॉल,पिचिंग कार्य,समतलीकरण, नए तालाब निर्माण,पुलिया निर्माण जैसे अनेक कार्यों से ग्राम पंचायत भरा पडा रहता था,हर गांव में मनरेगा से ही आधे दर्जन से अधिक कार्य स्वीकृत होते थे,ग्राम पंचायत नियत समय पर कार्य पुरा नहीं कर पाता था, लेकीन आज हालात उसके विपरित चल रहा,अभी की स्थिति में कुछ ही ग्राम पंचायत में कार्य चल रहे हैं,वह भी एक से दो नहीं और ज्यादातर मजदूरी भुगतान आवास योजना में हुए हैं इसके अलावा अन्य काम जिले के किसी पंचायत में ना के बराबर हुए हैं।अन्य मद का कार्य तो अब पंचायतों के सपने में भी अभी तक नहीं आया है,सही आंकलन करे तो ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को लेकर स्थिती ठीक नहीं चल रहीं,जिसकी वजह से सरपंच आज सिर्फ नाम के सरपंच रह गए है जिनका बस एक ही काम है,गांव में सिर्फ पंचायती करना।

विकास कार्य में सिर्फ दो ही कार्य–पीएम आवास,महतारी वंदन
वहीं प्रदेश का सारा बजट लगता है प्रधानमंत्री आवास योजना और महतारी वंदन योजना में खर्च हो रहा सूत्र बताते है कि ये दो योजनाओं ने बाकी योजनाओ को अजगर की तरह निगल लिया है,और भली भांति दिखाई भी दे रहा है हर गांव में आवास का भरमार है पक्की आवास की गति खरगोश से भी ज्यादा तेज है महतारी वंदन योजना का तो हर महीना किस्त आ ही रहा है सरकार की बड़ी योजना पीएम आवास और महतारी वंदन योजना बहुत ही लाभकारी साबित हो रहा जनता इस बात से तो खुश है की उन्हे पक्का मकान मिल रहा लेकीन इन योजनाओं के बाद बाकी योजनाओं की कार्यों का अभी पिटारा खुलना बांकी नही है और कब खुलेगा यह भी भगवान के भरोसे हैं?

क्या कहता है मनरेगा का आंकड़ा
मनरेगा में वर्ष 2024-25 की तुलना में वर्ष 2025-26 में ग्रामीण मजदूरों की स्थिति अति दयनीय हैं, हमने पिछले वर्ष की तुलना करने के लिए इस वर्ष का मनरेगा के तहत हुए कार्यों के मानव दिवस का आंकड़ा खंगाला तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। बता दे कि पिछले वर्ष पूरे जिले लगभग 5367143 कुल मानव दिवस मजदूरी रहा, जिसमें मिट्टी कार्य के अलावा अन्य निर्माण कार्य शामिल था,परन्तु गत वर्ष की तुलना इस वर्ष सिर्फ आवास योजना के तहत लोगों को बमुश्किल से पूरे जिले में लगभग 416734 कुल मानव दिवस मजदूरी मिल सका हैं,जबकि पंचायतों में निर्माण कार्यों का अब तक खाता भी नहीं खुल सका हैं,दोनों वर्षों के ग्रामीण मजदूरों के मानव दिवस को तुलना किया जाए तो पिछले वर्ष की अपेक्षा में इस वर्ष 10% से भी कम मानव दिवस मजदूरी ग्रामीणों को मुहैया कराया गया हैं।

उम्मीदों के सहारे जिंदा गांव का विकास
हर कुछ संभव तो नहीं लेकीन विकास की गति इतनी धीमी है इसे नकारा नहीं जा सकता लेकिन उम्मीद तो अब इसी सरकार से जनता 5 वर्ष तक के लिए कर रहा है और आगे स्थिती इससे अच्छी होने के संकेत तो जरुर मिल रहे है हो सकता है कुछ महीनो में विकास कार्यों का पिटारा खुल जाएं हालांकि ऐसा नहीं है की कार्य नहीं हो रहे बड़ी-बड़ी प्रोजेक्ट पर करोड़ो अरबों रुपये स्वीकृत हो चूके है, और कार्य भी प्रारंभ है खैर अब देखना होगा की वर्तमान में पंचायत विकास कार्य को लेकर चिंतित हैं आगे शायद सुनहरा पन्ना पलट सकता है और विकास की गति साय-साय हो?
